इम्फाल। अगर आप सोशल मीडिया पर बिना सोचे-समझे ही फोटो और वीडियो शेयर कर देते हैं, तो सावधान हो जाइए। मणिपुर के एक पत्रकार को भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करना महंगा पड़ गया। इस पत्रकार को मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत एक साल तक हिरासत में रखने की सजा सुनाई गई है।
दरअसल, मामला लगभग एक महीने पुराना है। मणिपुर के एक पत्रकार को सोशल मीडिया पर कथिततौर पर सत्तारूढ़ भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की थी, जिसके बाद उसे हिरासत में ले लिया गया था। लगभग एक महीने बाद मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत उसे एक साल तक हिरासत में रखने की सजा सुनाई गई।
पत्रकार वांगखेम ने अपने फेसबुक पर झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की जयंती पर एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें उन्होंने मणिपुर की भाजपा सरकार की आलोचना की थी। इस वीडियो में कथिततौर पर किशोरचंद्र वांगखेम ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का मणिपुर से कोई संबंध न होने के बावजूद उनकी जयंती को चिह्नित करने के लिए कार्यक्रम के आयोजन को लेकर बीरेने सिंह को प्रधानमंत्री मोदी और आरएसएस की कठपुतली कहा था। सूत्रों के मुताबिक, वीडियो क्लिप में उन्होंने सरकार को गिरफ्तार करने की भी चेतावनी दी थी।
हालांकि, उम्मीद की जा रही है कि उनका परिवार राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत 12 महीने के हिरासत की सजा को चुनौती देने देने वाले हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत अधिकतम हिरासत की अवधि 12 महीने ही होती है। बता दें कि किशोरचंद्र वांगखेम ने फेसबुक पर विवादास्पद पोस्ट करने से पहले एक स्थानीय समाचार चैनल आईएसटीवी के साथ अपनी नौकरी छोड़ दी थी। भारतीय पत्रकार संघ और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने गिरफ्तारी की निंदा की है।

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