देहरादून। वे दिन गए जब वित्तीय, तकनीकी, चिकित्सा, कानून और निर्माण क्षेत्रों से जुड़े पेशेवरों ही उच्च कमाई करते थे। हमारे समाज में हो रहे लगातार हो रहें बदलाव के कारण अब मुट्ठी भर पारंपरिक रूप से सफल उद्योगों रूप में सीमित नहीं हैं। इन दिनों भारतीय मध्यम वर्ग और उच्च मध्यम वर्ग के परिवार अपने बच्चों को कला और रचनात्मकता जैसे वैकल्पिक कैरियर के अवसरों को चुननें के लिए अनुमति दे रहें हैं और काफी खुले दिल इन कैरीयर्स में अपने बच्चों को भेज रहें हैं। अब की नई पीढ़ी पहले की पीढ़ियों के विपरीत अपनी पसंद के क्षेत्रों के भीतर अधिक प्रायोगिक और सुनिश्चित कैरियर की तरफ बढ़ रही है।
जेडी इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी की कार्यकारी निदेशक रूपल दलाल का कहना है कि पछला दशक हम सभी के लिए आंखें खोलने वाला रहा। हमने वैश्वीकरण, ई-लर्निंग की बदौलक रचनात्मक, और मशीन लर्निंग उद्योगों के भीतर असाधारण वृद्धि देखी है। डिजिटलाइजेशन और एआई में काफी प्रगति आयी हैं। ज्ञान के भंडार के साथ आज इंडस्ट्री के अग्रणी लोग बच्चों को कैरियर बनाने के लिए मार्गदर्शन भी दे रहें है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आज छात्रों को बाजार के हिसाब से तैयार किया जा रहा है, ताकी वे फैशन डिजाइन, इंटीरियर डिजाइन, ग्राफिक या इंडस्ट्रीयल डिजाइन, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, विडियो एडिटिं आदि जैसे नए-युग के रचनात्मक कैरियर में अपना भविष्य सवार सकें।

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