May 30, 2026

Uttarakhand Review

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एनएफएचएस-6 में उत्तराखंड ने बाल पोषण संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया

देहरादून। हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं की तलहटी में स्थित उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। राज्य में लगभग 175 प्रजातियों के औषधीय पौधे पाए जाते हैं। अपनी प्राकृतिक संपदा के साथ-साथ राज्य स्वास्थ्य विभाग तथा महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास (ॅम्ब्क्) विभाग के समन्वित प्रयासों के माध्यम से पोषण संबंधी परिणामों में सुधार के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। हाल ही में जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) उत्तराखंड में कुपोषण से संबंधित प्रमुख संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार को दर्शाता है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में अवरुद्ध वृद्धि (लंबाई-के-अनुसार आयु) की दर एनएफएचएस-5 के 27.0 प्रतिशत से घटकर एनएफएचएस-6 में 20.0 प्रतिशत हो गई है। इसी प्रकार, क्षीणता (वजन-के-अनुसार लंबाई) की दर 13.2 प्रतिशत से घटकर 11 प्रतिशत हो गई है। गंभीर क्षीणता तथा कम वजन वाले बच्चों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई है, जो राज्य में बेहतर बाल पोषण परिणामों की दिशा में उत्साहजनक प्रगति को दर्शाती है। यह सुधार विभिन्न विभागों के प्रभावी समन्वय तथा राष्ट्रीय पोषण एवं स्वास्थ्य कार्यक्रमों की विस्तारित पहुंच का परिणाम है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) तथा महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से उत्तराखंड सरकार गंभीर तीव्र कुपोषण , मध्यम तीव्र कुपोषण, अवरुद्ध वृद्धि तथा क्षीणता को कम करने के उद्देश्य से अनेक समन्वित हस्तक्षेपों का क्रियान्वयन कर रही है। पोषण अभियान के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग ने वर्ष 2019 से विभिन्न क्षेत्रों में अभिसरण आधारित पोषण हस्तक्षेपों को सुदृढ़ किया है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं पर्यवेक्षकों के लिए इंक्रीमेंटल लर्निंग अप्रोच के माध्यम से नियमित क्षमता-विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे सामुदायिक स्तर पर पोषण परामर्श एवं वृद्धि निगरानी की प्रक्रियाएं और अधिक प्रभावी हुई हैं। ऊंचाई एवं वजन मापन की सटीकता बढ़ाने के लिए राज्य के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस उपलब्ध कराए गए हैं। इन उपकरणों के माध्यम से कुपोषित बच्चों की समय पर पहचान संभव हो रही है तथा शीघ्र हस्तक्षेप सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, महालक्ष्मी किट, महिला पोषण एवं बाल पोषण जैसी योजनाओं ने मातृ एवं शिशु पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं तथा बच्चों को पोषण संबंधी सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मातृ पोषण तथा बच्चे के जीवन के पहले 1,000 दिनों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह अवधि वृद्धि अवरोध को रोकने, स्टंटिंग एवं वेस्टिंग को कम करने तथा दीर्घकालिक स्वास्थ्य एवं विकास संबंधी परिणामों में सुधार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तराखंड में वर्तमान में 148 मोबाइल स्वास्थ्य दल कार्यरत हैं, जो बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच करते हैं। ये दल प्रतिवर्ष लगभग 20,000 आंगनवाड़ी केंद्रों का दो बार भ्रमण करते हैं तथा लगभग 6.2 लाख पंजीकृत बच्चों की स्वास्थ्य जांच करते हैं। जांच के दौरान गंभीर तीव्र कुपोषण अथवा मध्यम तीव्र कुपोषण से प्रभावित पाए गए बच्चों को उचित उपचार एवं पोषण प्रबंधन के लिए संदर्भित किया जाता है।कुपोषित बच्चों के उपचार एवं पुनर्वास के लिए वर्तमान में हरिद्वार तथा ऊधम सिंह नगर जनपदों में दो पोषण पुनर्वास केंद्र संचालित हैं। ये केंद्र प्रभावित बच्चों को चिकित्सीय देखभाल, चिकित्सीय पोषण, परामर्श सेवाएं तथा निरंतर निगरानी प्रदान करते हैं। बच्चों को इन केंद्रों तक पहुंचाने के लिए आरबीएसके मोबाइल स्वास्थ्य दलों, एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं तथा स्वास्थ्य संस्थानों के कार्मिकों द्वारा समन्वित प्रयास किए जाते हैं। पोषण पुनर्वास केंद्रों से स्वस्थ होकर लौटने वाले बच्चों की नियमित अनुवर्ती निगरानी भी मोबाइल स्वास्थ्य दलों द्वारा की जाती है, ताकि उनका स्वास्थ्य सुधार स्थायी बना रहे और कुपोषण की पुनरावृत्ति न हो। इन समेकित प्रयासों के माध्यम से उत्तराखंड बाल पोषण में सुधार, कुपोषण में कमी तथा बच्चों के लिए स्वस्थ भविष्य के निर्माण की अपनी प्रतिबद्धता को निरंतर मजबूत कर रहा है।