August 10, 2026

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हल्द्वानी में कांग्रेसियों का व्यवहार, राहुल की अराजक राजनीति का विस्तारः भट्ट

देहरादून। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने हल्द्वानी में कांग्रेस नेताओं की शर्मनाक करतूत को राहुल की अराजक राजनीति का विस्तार बताया है। उन्होंने निशाना साधा कि राहुल पीएम आवास के सामने धरना  देते हैं, सदन में हंगामों को शह देते हैं, शर्टलेस अपराधियों को शेर बताते हैं। ऐसे में राज्य कांग्रेस नेताओं में उनके हंगामे वाले बब्बर शेर बनने की होड लगना स्वाभाविक है। ऐसा करके उन्होंने प्रशासनिक संस्थाओं ही नहीं, प्रदेश की जनता और समूची राजनैतिक व्यवस्था के अपमान का काम किया है, जिसके लिए कांग्रेस नेतृत्व को तत्काल सार्वजनिक माफी मांगने चाहिए।
उन्होंने मीडिया द्वारा पूछे सवालों के जवाब में कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उत्तराखंड दौरे के दौरान उनके वरिष्ठ नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के अराजक, अभद्र व्यवहार तथा अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को इस शर्मनाक घटनाक्रम के लिए प्रदेश की जनता और व्यवस्था से माफी मांगनी चाहिए तथा जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी चाहिए। क्यूंकि कांग्रेस नेताओं ने अपने ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे के दौरान जिस तरह के शर्मनाक व्यवहार का प्रदर्शन किया, उससे स्पष्ट है कि कांग्रेस में न तो अपने वरिष्ठ नेताओं का सम्मान बचा है और न ही लोकतांत्रिक, राजनीतिक शिष्टाचार ।
उन्होंने निशाना साधा कि कांग्रेस के प्रदेश नेताओं का यह आचरण अचानक पैदा नहीं हुआ है, बल्कि यह कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से लगातार मिल रहे राजनीतिक संस्कारों का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने संसद से लेकर सड़क तक लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। हाल में नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा को ताक पर रखते हुए प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठना हो या संसद में लगातार अमर्यादित व्यवहार के मामले हों, कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने विरोध की राजनीति को अराजकता में बदलने का काम किया है। देश ने देखा कि दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय एआई समिट के दौरान हुए आपत्तिजनक शर्टलेस प्रदर्शन के संदर्भ में राहुल गांधी द्वारा प्रदर्शनकारियों को ‘बब्बर शेर’ बताना भी कांग्रेस नेतृत्व की अराजक राजनीति के प्रति सहानुभूति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब शीर्ष नेतृत्व ही ऐसे तत्वों को प्रोत्साहन देने वाला संदेश देगा तो प्रदेश कांग्रेस के नेताओं में भी अराजकता की प्रतिस्पर्धा होना स्वाभाविक है।
उन्होंने तंज कसा कि कांग्रेस में शायद यह होड़ लगी हुई है कि कौन लोकतांत्रिक मर्यादाओं को सबसे पहले और सबसे ज्यादा तोड़ेगा। प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने अपने आचरण से यह साबित किया है कि उनके लिए राजनीतिक विरोध का मतलब अभद्रता, अपमान और अराजकता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र में विचारों का विरोध पूरी तरह स्वीकार्य है, लेकिन विरोध के नाम पर भाषा की मर्यादा तोड़ना, सार्वजनिक जीवन की गरिमा को चोट पहुंचाना और राजनीतिक शिष्टाचार को खत्म करना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि कांग्रेस अपने नेताओं के कृत्यों से केवल अपना अपमान नहीं करवा रही, बल्कि समूची राजनीतिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को भी चोट पहुंचा रही है। ऐसे आचरण से ही आम जनता में राजनेताओं के प्रति अविश्वास और राजनीति के प्रति नकारात्मक धारणा पैदा होती है। उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व से स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि उनमें लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति थोड़ी भी प्रतिबद्धता है तो वे इस पूरे प्रकरण पर मौन साधने के बजाय सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और दोषी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं पर कठोर कार्रवाई करें। कांग्रेस को यह समझना होगा कि उत्तराखंड की जनता अराजकता नहीं, बल्कि विकास, सुशासन, शालीनता और लोकतांत्रिक संवाद की राजनीति चाहती है।