November 3, 2026

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गढ़वाली कविताओं की गूंज के साथ संपन्न हुआ 10 दिवसीय उत्तराखण्ड कौथिग

देहरादून। अखिल गढ़वाल सभा की ओर से रेंजर्स ग्राउंड में आयोजित 10 दिवसीय उत्तराखण्ड कौथिग का समापन मंगलवार को गढ़वाली कवि सम्मेलन के साथ हुआ। समापन दिवस पर सुबह खेलकूद प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, वहीं शाम को आयोजित कवि सम्मेलन में गढ़वाली कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से पहाड़ की संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक सरोकारों और बदलते ग्रामीण जीवन की तस्वीर प्रस्तुत की। कवि सम्मेलन में हास्य, संवेदना और लोकजीवन से जुड़ी कविताओं ने श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। कौथिग स्थल पर सुबह 11 बजे आयोजित खेलकूद प्रतियोगिताओं में सभा के सदस्यों के साथ दर्शकों ने भी प्रतिभाग किया। महिलाओं की म्यूजिकल बॉल प्रतियोगिता से खेलों का शुभारंभ हुआ। इसमें रंजना ने प्रथम, लक्ष्मी बहुगुणा ने द्वितीय और कली नेगी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
60 वर्ष से कम आयु वर्ग की महिलाओं की चम्मच-गोली दौड़ में कमलेश सेमवाल प्रथम, गंगा नेगी द्वितीय और मीणा राणा तृतीय स्थान पर रहीं। वहीं, 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की महिलाओं की चम्मच-गोली दौड़ में शांता नेगी ने प्रथम, शकुंतला नेगी ने द्वितीय और बसंती बिष्ट ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। अंत में आयोजित म्यूजिकल चेयर प्रतियोगिता ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। इसमें कुसुम पटवाल प्रथम, द्वारिका बिष्ट द्वितीय और किरण खंडूरी तृतीय स्थान पर रहीं। प्रतियोगिताओं के दौरान प्रतिभागियों और दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिला।
शाम छह बजे आयोजित गढ़वाली कवि सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व सैनिक कल्याण परिषद के अध्यक्ष ब्रिगेडियर जेएनएस बिष्ट और विशिष्ट अतिथि सुप्रसिद्ध साहित्यकार नंद किशोर हटवाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। हटवाल की लिखी कहानी पर आधारित गढ़वाली फिल्म ‘की ढोली’ को हाल ही में राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर साहित्यिक जगत में उनकी उपलब्धि की सराहना की गई। कवि सम्मेलन का शुभारंभ कवयित्री प्रिया देवली ने अपनी रचना ‘मेरु अस्तित्व पता नि, तुम मि तैं क्या समझदा’ के पाठ से किया। इसके बाद कोटद्वार से आए राकेश ध्यानी ने ‘मशक दमो साज रयाँ, कोठारों अनाज रयाँ’ कविता प्रस्तुत कर लोकजीवन की झलक दिखाई।
पौड़ी से आए मधुसूदन थपलियाल ने ‘मौत का जागर लग्यां छन आज ब्याली’ कविता के माध्यम से संवेदनाओं को अभिव्यक्त किया। टिहरी के घनसाली से आई मधुरवादिनी तिवाड़ी ने ‘अंच्छया मैल्या मुल्क, बिसरया ढोल दमो की चाल, हमुन खूब मनाई बग्वाल’ रचना के जरिए लोकसंस्कृति और परंपराओं को याद किया। प्रसिद्ध कवि हेमवती नंदन भट्ट ‘हेमू’ ने ‘एंसु का बग्वाल डेरे मा मनोला, उत्तराखंड बनिगे हे जी मुल्क पाली जौला’ कविता प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावुक कर दिया। कोटद्वार से आई रिद्धि भट्ट ने ‘समलौण्य रैगिंन, वो गुड्डा गुड़िया, वाला दिन कंचा गुल्ली डंडा कुड़ी बाज्यून वाला दिन’ रचना के माध्यम से बचपन की यादें ताजा कीं। पौड़ी के वीरेंद्र पंवार ने ‘पाज हद से मेले से लाचार छन, जॉन बुन्यु छौ तौन गिच्चा म्वाला छन’ कविता प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी। मदन मोहन ढुकलान ने ‘बरसु बाद, मि घर गौं, सेई कूड़ी बिजिगे, चैक नाचन बैठी गेन, सीढ़ी हिटन बैठी गेन’ गीत के माध्यम से पहाड़ के गांवों और पारंपरिक जीवन की तस्वीर उकेरी।
टिहरी से आए धर्मेंद्र उनियाल ने ‘उमर हवेगी साठ भुला, अब नि रैन ठाट भुला’ रचना प्रस्तुत कर श्रोताओं को गुदगुदाया। कवि सम्मेलन के संचालक डॉ. मुनिराम सकलानी ‘मुनींद्र’ ने ‘पहाड़ की अटलता की तरों, अटल हमारू विश्वास’ कविता प्रस्तुत कर तालियां बटोरीं।  सुप्रसिद्ध कवि लोकेश नवानी ने ‘कविता को एक बाटो, कोरी धरना अर ऐंच एंचे भजर से निकलदन’ रचना प्रस्तुत की। वहीं जय विशाल रावत गढ़देसी ने ‘कर्णप्रयाग ना घोर ब्वारी तैं करवा चैथ, अर व्रत करनी करवा चैथ’ कविता के माध्यम से हास्य का रंग जमाया। कवि सम्मेलन का संचालन साहित्य सचिव डॉ. मुनिराम सकलानी ‘मुनींद्र’ ने किया। कवियों की प्रस्तुतियों के साथ ही 10 दिवसीय उत्तराखण्ड कौथिग का विधिवत समापन हुआ।
सभा अध्यक्ष रोशन धस्माना और महासचिव गजेंद्र भंडारी ने कौथिग के समापन अवसर पर कलाकारों, प्रायोजकों, अतिथियों, दर्शकों, मीडिया और समाचार पत्रों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से इस बार कौथिग को भव्य स्वरूप प्रदान किया जा सका। उन्होंने भविष्य में भी इसी प्रकार सहयोग बनाए रखने की अपेक्षा की। इस अवसर पर सभा उपाध्यक्ष निर्मला बिष्ट, प्रवक्ता अजय जोशी, पीटी उदय शंकर भट्ट, वीरेंद्र असवाल, नत्था सिंह पंवार, डॉ. सूर्य प्रकाश भट्ट सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कौथिग स्थल पर हेल्थ नेटवर्किंग सेवा संस्थान की ओर से आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में मंगलवार को 114 लोगों ने स्वास्थ्य जांच कराई। शिविर में चिकित्सकों ने लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परामर्श दिया। शिविर में फिजिशियन डॉ. श्रीनंद उनियाल, सर्जन डॉ. एमपी मैठानी, डॉ. एसपी भट्ट, दिव्यांग विशेषज्ञ डॉ. वीके नौटियाल, भट्ट ऑप्टिकल्स और आभा शर्मा सहित अन्य सहयोगियों ने सेवाएं प्रदान कीं।