रुद्रप्रयाग। जनपद रुद्रप्रयाग में महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार को नई दिशा देने की पहल के तहत विकास खंड जखोली एवं अगस्त्यमुनि के स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं के लिए जनपद पौड़ी के विकास खंड नैनीडांडा में आयोजित तीन दिवसीय शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपंन हुआ। यह कार्यक्रम महिलाओं को पीरूल (चीड़ के पत्तों) के मूल्य संवर्धन के माध्यम से आय सृजन के ठोस और व्यावहारिक अवसरों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
इस भ्रमण के दौरान महिलाओं को पीरूल के वैज्ञानिक प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में उन्हें बताया गया कि किस प्रकार पीरूल को नमी से सुरक्षित रखा जाए, उन्नत तकनीकों से संग्रहण किया जाए, आधुनिक औजारों का प्रभावी उपयोग हो, तथा उसे चूर्ण या छोटे टुकड़ों में परिवर्तित कर उपयोगी उत्पादों में बदला जाए। साथ ही मशीनों के संचालन और उनके रख-रखाव से जुड़ी तकनीकी जानकारी भी साझा की गई।
महिलाओं ने प्रशिक्षण इकाई में चल रही समस्त प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन कर संग्रहण से लेकर उत्पादन और विपणन तक की पूरी श्रृंखला को गहराई से समझा। इस अनुभव ने उनमें आत्मविश्वास जगाया और कई प्रतिभागियों ने अपने क्षेत्रों में पीरूल आधारित उद्यम स्थापित करने की इच्छा भी जताई।
इस अवसर पर खंड विकास अधिकारी, नैनीडांडा श्री प्रमोद चन्द्र पाण्डे ने कहा कि पीरूल को अब वन अपशिष्ट के रूप में नहीं, बल्कि आर्थिक संसाधन के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने महिलाओं को समूह आधारित इकाइयों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। वहीं मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत ने बताया कि जनपद में पीरूल प्रस्करण को बढ़ावा देने के लिए एक ठोस कार्ययोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में बड़ी संख्या में महिलाओं को इस पहल से जोड़कर रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे।
यह पहल न केवल वनाग्नि की घटनाओं को नियंत्रित करने में सहायक होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सतत आजीविका को भी मजबूती प्रदान करेगी। पीरूल, जो कभी जंगलों में बेकार समझा जाता था, अब महिलाओं के लिए आर्थिक समृद्धि का सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है।
रुद्रप्रयाग में पिरूल बनेगा महिलाओं की आर्थिकी का जरिया

More Stories
बाबा विश्वनाथ जगदीशिला की डोली ने किया गंगा स्नान
एक ही आंगन में छह शादियां, जौनसार बावर की ‘जोजोड़ा’ परंपरा बनी मिसाल
सुरक्षा को खतरा बने जिले के 56 जर्जर विद्यालय भवन जिला प्रशासन ने कराए ध्वस्त