आगामी 29 सितंबर से शुरू हो रहे मां कुंजापुरी पर्यटन और विकास मेले को लेकर सभी तरह की लगभग पूरी हो चुकी है पूरे शहर को एक दुल्हन की तरह सजाने का काम पूरे जोर-शोर पर है वही दूसरी तरफ पालिका अध्यक्ष राजेंद्र विक्रम सिंह पवार सभी कार्यों की लगातार मोनेटरिंग भी कर रहे है मेले को भव्य रूप देने के लिए किसी भी तरह से कोई ढील नही बरती जा रही है
वर्ष 1972 से प्रतिवर्ष दशहरा पर्व से पहले नवरात्रों के दौरान मां कुंजापुरी मंदिर में पर्यटन एवं विकास मेले का आयोजन किया जाता है यह क्षेत्र के सबसे बड़े पर्यटक आकर्षण केंद्रों में से एक है इसमें पड़ोसी क्षेत्रों के साथ-साथ दुनिया भर के दर्शक भाग लेते हैं यहां मेला पर्यटन एवं विकास को बढ़ावा देने की दोहरी भूमिका निभाता है इस प्रकार की सांस्कृतिक प्रदर्शनी और संगीत एवं नृत्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिसमें देशभर के कलाकार हिस्सा लेते हैं सरकार भी विकास के एक साधन के तौर पर इस मेले को उपयोग करती आ रही है तथा स्थानीय किसानों को फसलों और खेती की तकनीकी के बारे में जानकारी देने के लिए इस अवसर का प्रयोग किया जाता है आपको बता दें कुंजापुरी मंदिर का निर्माण सन 979 के समय किया गया था मंदिर का प्रवेश द्वार ही इसका आकर्षक है और मंदिर की आल्हा में चार चांद लगा देता है मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का इस्तेमाल किया जाता है जो मंदिर की ऊंचाई से वाकिफ कराती प्रतीत होती है मंदिर परिसर में शिव भैरव महाकाली तथा नर्सों की मूर्तियां विराजित है कुंजापुरी मंदिर श्वेत रूप में निर्मित है परंतु फिर भी मंदिर के कुछ भागों में अन्य मनमोहक रंगों का भी उपयोग किया गया है प्रवेश द्वार के सामने शेर की मूर्ति को देखा जा सकता है जो देखने में ऐसा प्रतीत होता है जैसे कि यह शेर मां के मंदिर की रखवाली में लगाओ मंदिर के गर्भ में गड्ढा बना हुआ है मान्यता है कि इसी स्थान पर माता का कुंजा गिरा था इस स्थान को बहुत ही पूजनीय माना जाता है यही मां की पूजा होती है और इसी कुंज भाग की कृपा से इस सिद्ध पीठ मंदिर का नाम कुंजापुरी पड़ा

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