November 6, 2026

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12 दावेदारों के अरमानों पर फिरा पानी, लैंसडोन में अनुकृति गुसांई, पढ़िये पूरी खबर

संवाददाता, लैंसडोेन
आखिरकार कांग्रेस में लैंसडोन सीट पर बना सस्पेंस समाप्त हो गया है। जैसे कयास लगाये जा रहे थे, ठीक वैसा ही हुआ। यहां हरक सिंह रावत की बहू अनुकृति को कांग्रेस ने प्रत्याशी घोषित किया है। इसके सियासी नफा-नुकसान व मायने तलाशे जा रहे हैं। इसके साथ ही 12 दावेदारों के अरमानों पर भी पानी फिर गया है। पेश है लैंसडोन विधानसभा पर यह खास रिपोर्ट।
दरअसल, कालोंडांडा के मैदान में कांग्रेस के उन 12 आवेदकों को समझ लेना चाहिए था कि जहां नीति, नियम व निष्ठा जैसे शब्दों का वजूद खत्म हो जाता है वहां मौजूदा सियासत की परिभाषा शुरू होती है। इसका ताजा उदाहरण लैंसडाउन में कांग्रेस की सूची में शामिल नाम है। अब ज्येाति रोतेला, दीपक व रघुवीर सिंह सहित उन 12 दावेदारों के समक्ष चुनौती है कि किस तरह वह अपने संकल्प को बचा सकते हैं, जो अंतिम क्षण तक हरक या उनकी बहू की लैंसडाउन में एंट्री की जबरदस्त मुखालफत कर रहे थे।बेशक अनुकृति भी लैंसडाउन की ही बेटी हैं, उनके ससुर भी इस नाम की पुरानी विधानसभा से दो बार प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं। लेकिन पिछले 5 साल से कांग्रेस के नाम निशान के साथ चुनावी तैयारियों में लगे अनेक जमीनी नेताओं का निराश होना लाजिमी है। यह दावेदार लगातार भाजपा विधायक के खिलाफ 10 वर्षों की एन्टी इनकमबेंसी को कांग्रेस के पक्ष में करने को जी तोड़ मेहनत भी कर रहे थे, लेकिन अचानक सूबे की सियासत में हरक की फरकन का सबसे अधिक नुकसान हुआ है तो लैंसडाउन के उन कांग्रेस नेताओं का हुआ है जो अब क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का ख्वाब संजोए हुए थे।बदले हुए हालात में यदि कुछ दावेदार बगावत की इन्तेहाँ पार करते हैं तो एन्टी इनकमबेंसी के बावजूद महंत दलीप रावत आसानी से तीसरी बार इस मठ के मठाधीश बनने की दहलीज पर होंगे। दूसरा पहलू यह भी है कि निःसंदेह हरक एक करिश्माई नेता हैं, मौजूदा सियासत के दौर में कैसे चुनावी मैदान फतेह करना है, उन्हें बखूबी आता है। लाख नैतिक और कागजी विरोध के बाद भी अनुकृति चुनाव जीत जाए, इस संभावना को भी खारिज नहीं किया जा सकता।