उत्तरप्रदेश उत्तराखण्ड

अबकी बार जब मि प्रधन बनलु-एक गढ़वाली हास्य कविता जो चुनाव प्रचार प्रसार की हकीकत बयां करती है

अबकी बार जब मि प्रधन बनलु

चुनावी चक्कलस
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ऐंसू द्यो मित न, मेरी ब्वारी चुनाव लड़ळी ।।
मित पैली रौं प्रधान अबकि द्यों वी बणळी ।।

ब्वारी जिताणु पूरू-पूरू जतन करुल ।
चुनावी मंडाण म रूप्यों कु हवन करुल ।
कच्ची-पक्की,अध्या-पव्वे प्रसाद बँटुल ।
लोकतन्त्रे जड़ियूँ म भ्रष्टाचारे खाद डलुल ।
भौं कुछ ह्वे जयाँ बै सत्ता अपुण घॉर राली ।

ऐंसू द्यो मित न, मेरी ब्वारी चुनाव लड़ळी ।।
मित पैली रौं प्रधान अबकि द्यों वी बणळी ।।

नारी शसक्तीकरण का नारा लगे वोट मँगुल ।
सत्ता अपुणु हथ रैली,जनि मर्जी चोट करुल ।
गाँव म पंच बणाणे ,चार चकड़ेत कट्ठा करोल ।
अपुणि ब्वारी भलु बथै,औरु ब्वारयों ठठा लगोल ।
ब्वारी त नाम रालू , प्रधनिचरी मेरी चलळी ।

ऐंसू द्यो मित न, मेरी ब्वारी चुनाव लड़ळी ।।
मित पैली रौं प्रधान अबकि द्यों वी बणळी ।।

जु बाटू म्यार बणायूँ ,वी बाटू ऐंसू बणाण ।
और कुछ करण नी, वेमा हि फीता धराण ।
जे ई आलू ,बाटू नापल, कमीशन काटल ।
प्रधान जी कु भौत बढिया काम ब्वालल ।
खा-पेकी गाँव की जनता कुछ नि ब्वालली ।

ऐंसू द्यो मित न, मेरी ब्वारी चुनाव लड़ळी ।।
मित पैली रौं प्रधान अबकि द्यों वी बणळी ।।

प्रधनि कु मद-पद सत्ता की य रौंस मेरी।
बजटे खरोला-खरोल,जनि मर्जी, धौंस मेरी ।
राजनीति इकत्या खेल,योजनाओं रेल-पेल ।
रुप्योंकु घॉल-मेल, मथि-मथि ताल-मेल ।
जन मिन सप्वाड़, वनि वो बि सप्वाड़ळी ।

ऐंसू द्यो मित न, मेरी ब्वारी चुनाव लड़ळी ।।
मित पैली रौं प्रधान अबकि द्यों वी बणळी ।।

जगदीश गढ़वाली डिम्पल रौतेला,इंद्रजीत असवाल

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